पितृ दोष (Pitra Dosha)

pitra dosh

कुंडली में एक अहम दोष पितृ दोष (Pitra Dosha in Kundali) को भी माना जाता है। कई लोग इसे पित्ररों यानि पूर्वजों के बुरे कर्मों का फल मानते हैं तो कुछ का मानना है कि अगर पित्ररों का दाह-संस्कार सही ढंग से ना हो तो वह नाखुश होकर हमें परेशान करते हैं। कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में दो कोई दो एक ही घर में मौजुद हो।

ज्योतिष में पितृदोष का बहुत महत्व माना जाता है। प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में पितृदोष सबसे बड़ा दोष माना गया है। इससे पीड़ित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है। जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है। पितृदोष से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है।

कालस्यकुटिलागति:

अकाल (उपगति) मृत्यु लक्षण
दुर्घटना, बिमारी, अंतरिक्ष में मृत्यु, हस्पताल में मृत्यु, छत पर मृत्यु, चारपाई पर मृत्यु. प्रसव काल में मृत्यु, पानी में डूबकर मृत्यु, मृत्यु के समय दिया बत्ती (दीपक) दान ना होना, मृत्यु समय में गोदान न होना, पशु के द्वारा मार जाना, जलने से मृत्यु, बिजली के करंट से मृत्यु, विष द्वारा मरना, आत्महत्या, सर्पदंश, पहाड़ या किसी भी ऊँचे स्थान से गिरकर मृत्यु, जल में डूबकर मर जाना, कुंवारेपन में मृत्यु आदि अनेक लक्षण *अकाल मृत्यु के हैं | इन दोषों के निवारण हेतु पेहोवा तीर्थ में करमकाण्ड करवाना चाहिए | ताकि मृत प्राणी अपगति से सदगति को प्राप्त हो |

पितृ दोष निवारण

पितृ दोष से युक्त जोड़े को संतान प्राप्ति में बेहद कठिनाई होती है। गर्भ ठहरने के बाद लगातार गर्भपात की समस्या आने पर इस दोष पर विचार कर लेना चाहिए। पितृ दोष से मुक्ति के कुछ विशेष उपाय:
* इस दोष से मुक्ति के लिए पितृ पक्ष में पित्ररों का दान और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
* श्रीकृष्ण-मुखामृत गीता का पाठ करना चाहिए।
* पीपल के पेड पर जल, पुष्प, दूध, गंगाजल, काला तिल चढ़ाकर अपने स्वर्गीय परिजनों को याद कर उनसे माफी और आशीष मांगना चाहिए।
* रविवार के दिन गाय को गुड़ या गेंहू खिलाना चाहिए।

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