Tirth Purohit & Astrologer

Pandit Deepak Pancholi

Hi I am Pandit Deepak Pancholi, currently residing in Pehowa, India. I have keen interest in astrology and have a very good knowledge in the same. I have got 25 years of experience in performing pooja, Pitra Dosh Nivaran, Kundali Milan. I also have the same experience in astrology.

I perform Vedic Pooja, Pitra Dosh Nivaran, Kundali Milan and Astrology. You can contact me for any above mentioned Pooja.

कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में से कोई दो एक ही घर में मौजुद हो। पितृ दोष के और भी कई प्रकार हैं, जिनका सीधा सम्बन्ध किसी न किसी मृत पितृ की अशांति है|
ज्योतिष में पितृदोष का बहुत महत्व माना जाता है। प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में पितृदोष सबसे बड़ा दोष माना गया है। इससे पीड़ित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है। जिस जातक की कुंडली में यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है। पितृदोष से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है।

कुंडली को देखकर 36 गुणों के आधार पर यह मिलान किया जाता है। मान्यता है कि जितने ज्यादा गुण मिलते हैं जोड़ी उतनी ही अच्छी बनती है। भारतीय समाज में मान्यता है कि बिना कुंडली मिलान के की गई शादी के टूटने की संभावना रहती है।कुंडली मनुष्य के स्वभाव, उसकी पसन्द और नापसन्द, सामाजिक व्यवहार की कुशलताएं और उसके व्यवहार करने के तरीके के बारे में भी बताती है। भारतीय समाज में विवाह को जन्मों का संबंध माना जाता है। संभावित दूल्हा और दुल्हन के मध्य संवादिता सुनिश्चित करने के लिये उनकी कुडली का मिलान करना ही एक विकल्प है। विवाह के बाद युगल एक दूसरे को प्रभावित करते हैं और उनकी कुंडली का सम्मिलित असर उनके भविष्य पर होता है।

राशिफल (Rashifal) या जन्म-कुंडली ज्योतिषीय घटनाओं पर आधारित एक चार्ट होता है जिसमें एक व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य की जानकारियाँ, खगोलीय घटनाओं के आधार पर दर्शायीं गयी होती हैं।जन्म-कुंडली ज्योतिषीय घटनाओं पर आधारित एक चार्ट होता है जिसमें एक व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य की जानकारियाँ, खगोलीय घटनाओं के आधार पर दर्शायीं गयी होती हैं। इन्हीं खगोलिय पिंडों का अध्ययन कर,किसी व्यक्ति या किसी घटना के प्रभाव और दुष्प्रभावों को आंका जाता है। एक राशिफल को बनाते या देखते समय व्यक्ति के जन्म समय पर ग्रहों की स्थिति को देखना होता है जैसे कि चन्द्र कौनसी राशि में है एवं सूर्य ग्रह कहाँ है तथा अन्य ग्रहों की चाल क्या है। ब्रह्माण्ड में 9 ग्रह माने गये हैं- सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु। इसी तरह से 12 राशियाँ हैं।

पूजा अथवा पूजन किसी भगवान को प्रसन्न करने हेतु हमारे द्वारा उनका अभिवादन होता है। पूजा दैनिक जीवन का शांतिपूर्ण तथा महत्वपूर्ण कार्य है। यहाँ भगवान को पुष्प आदि समर्पित किये जाते हैं जिनके लिये कई पुराणों से छाँटे गए श्लोकों का उपयोग किया जाता है। वैदिक श्लोकों का उपयोग किसी बड़े कार्य जैसे यज्ञ आदि की पूजा में ब्राह्मण द्वारा होता है। सर्वप्रथम प्रथमपूज्यनीय गणेश की पूजा की जाती है।

पितृ दोष निवारण - गति दिवा बत्ती

कुंडली में पितृ दोष तब होता है जब सूर्य, चन्द्र, राहु या शनि में दो कोई दो एक ही घर में मौजुद हो।ज्योतिष में पितृदोष का बहुत महत्व माना जाता है।

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Kundali Milan - Pandit Deepak Pancholi - Saraswati Tirth Pehowa

कुंडली मिलान

कुंडली को देखकर 36 गुणों के आधार पर यह मिलान किया जाता है। मान्यता है कि जितने ज्यादा गुण मिलते हैं जोड़ी उतनी ही अच्छी बनती है।

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ज्योतिष कार्य

राशिफल (Rashifal) या जन्म-कुंडली ज्योतिषीय घटनाओं पर आधारित एक चार्ट होता है जिसमें एक व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य की जानकारियाँ दर्शायी है

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हवन

यज्ञ का अर्थ है- शुभ कर्म। श्रेष्ठ कर्म। सतकर्म।  वेदानुसार यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं-(1) ब्रह्मयज्ञ (2) देवयज्ञ (3) पितृयज्ञ (4) वैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ.

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कथा

कथा भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैदिक कहानियो को मौखिक रूप से  विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करना ही कथा कहलाता है। 

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मुहूर्त

आम भाषा में हम जिसे शुभ और अशुभ समय कहते हैं  ज्योतिषशास्त्र कहता है किसी भी कार्य की सफलता के लिए कार्य शुभ मुहूर्त में होना आवश्यक है

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पितृ दोष निवारण, गति दिवा बत्ती, ज्योतिष कार्य, मुहूर्त इत्यादि
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